Soichiro Honda -True Inspirational Story
ना संघर्ष ना तकलीफ, तो क्या मज़ा है जीने में ।
बड़े बड़े तूफान थम जाते हैं, जब आग लगी हो सीने में।।
तो इसी के साथ अब हम बात करेंगे होंडा कंपनी को बनाने वाले Soichiro Honda की। जिन्होंने अपनी मेहनत, लगन और हिम्मत के दम पर एक ऐसे मोटरबाइक कंपनी खड़ी कर दी जो पूरी दुनिया में मोटरबाईक में अपना कब्ज़ा बनाये हुए है। इसके अलावा ऑटोमोबाइल में भी कंपनी दुनिया में आठवें नंबर पर है। आज इस कंपनी लाखो लोग काम करते है और अरबों-खरबों रुपया कमाती है लेकिन आपको ये जानकर हैरानी होगी कि इस कंपनी की शुरुआत एक छोटी सी गैराज से हुई थी।
Soichiro Honda का जन्म जापान के एक छोटे से गांव में हुआ था। उनके पिता एक लोहार थे जो पुरानी टूटी फूटी साईकलों को ठीक करके उन्हें बेचने का काम किया करते थे। हौंडा को भी बचपन से औजारों से खेलने का बड़ा शौक था इसलिए वो भी पिता के कामो में उनका हाथ बटाते थे। घर के माहौल को देखते हुए उन्हें पढ़ना लिखना बिलकुल भी पसंद नहीं था इसलिए उन्होंने 16 साल की उम्र में ही पढ़ाई को छोड़ दिया था।
पढ़ाई को छोड़ने के बाद वो एक कार कमपनी में मैकेनिक की जॉब करने के लिए टोक्यो शहर चले गए। टोक्यो पहुँचने के बाद उन्हें कंपनी में तो ले लिया गया लेकिन उनकी उम्र को देखते हुए सिर्फ साफ सफाई का काम दिया गया। वो उस कंपनी में सबसे कम उम्र के वर्कर थे। कुछ समय बाद उन्होंने कंपनी के मालिक से निवेदन किया कि उसे मकैनिक का काम सिखने दे। मालिक ने उसकी बात को मानते हुए उसे एक दूसरी ब्रांच में भेज दिया जहा रात में रेसिंग कार को तैयार किया जाता था। हौंडा अपनी मेहनत और लगन से काम सिखने लगे और कुछ महीनो में ही एक अच्छे मैकेनिक बन गए। फिर ठीक उसी साल उसकी कंपनी ने जापान की कार रेसिंग में अपनी सुखोई कार के साथ भाग लिया और उनकी कंपनी की कार रेस में पहले नंबर पर आयी। Honda भी इस कार के मैकेनिक के रूप में काम कर रहे थे। इस जीत के बाद सुखोई जापान की पसंदीदा कार बन गयी।
जिसके बाद कंपनी ने अपनी बहुत सारी ब्रांच खोली और इसके कारण एक ब्रांच को संभालने के लिए Honda को जिम्मेदारी दी गयी। लेकिन 1928 में Honda ने सुखोई कंपनी छोड़ दी और घर वापस आ गई।
घर वापस आने के बाद उन्होंने खुदका काम शुरू किया और मैकेनिक का काम करने लगे। मैकेनिक का काम करते करते उन्होंने दूसरी बड़ी कंपनियों के लिए पिस्टन रिंग बनाने का फैसला किया। फिर उन्होंने अपना सब कुछ लगाकर एक कंपनी शुरू की और पिस्टन रिंग बनाने का काम शुरू कर दिया। फिर काफी मेहनत और मस्सकत के बाद उन्हें पहले आर्डर टोयोटा कंपनी से मिला और टोयोटा के पिस्टन रिंग बनाने लगे। लेकिन कुछ समय बाद ही हौंडा का एक रेस के दौरान एक एक्सीडेंट हो गया और उनको हॉस्पिटल में ही 3 से 4 महीने के लिए रहना पड़ा और वहीं उन्हें पता चला की उनके पिस्टन रिंग की क़्वालिटी तय मनको की न होने के कारण पास हो हो सके और उन्होंने टोयोटा का आर्डर खो दिया था। उनकी सारी कमाई डूब चुकी थी।
उन्होंने फिर से अपने आप को खड़ा किया और दोबारा पिस्टन रिंग की क़्वालिटी को अच्छा बनाने के लिए बड़ी बड़ी कंपनी के लोगो से मिले। लेकिन फिर उनपर एक और आपदा आ पड़ी। 1944 में दूसरे विश्व युद्ध के समय अमेरिकी हमले में उनकी फैक्ट्री पूरी तरह जलकर खत्म हो गयी। लेकिन उन्होंने हिम्मत नहीं हरी और अपनी कंपनी के अवषेशो को बेच दिया और जो भी पैसा मिला उससे Honda Technical Research Institute शुरू किया।
Honda ने देखा कि युद्ध के बाद जापान की इकॉनमी बिलकुल खत्म हो गयी थी और लोग पैदल तथा साईकल पर आ गए थे जिससे हौंडा को आईडिया आया और उन्होंने साईकल में एक छोटा इंजन जोड़ दिया। Honda का ये प्रोडक्ट आम जनता को बहुत पसंद आया। फिर यही से HONDA की सफलता की शुरूआत हो गयी थी। फिर 1949 में उन्होंने कंपनी का नाम बदलकर HONDA MOTOR COMPANY रख दिया। फिर इसी साल हौंडा ने अपनी 2 STOCK बाइक भी निकली और फिर कभी HONDA ने पीछे मुड़कर नहीं देखा।
फिर कुछ सालो बाद जब जापान की अर्थव्यवथा सुथरी तो हौंडा ने कार बनाना भी शुरू कर दिया और वह भी खूब सफलता पायी। Honda Company के सफल होने का एक कारण ये भी था कि हौंडा सिर्फ कस्टमर का ही नहीं अपने कर्मचारियों का भी पूरा ख्याल रखते थे और सबको बराबर सम्मान देते थे। फिर अपनी इतनी सारी अपार सफलता हासिल करने के बाद 1991 में उन्होंने दुनिया को अलविदा कह दिया।
Soichiro Honda ने अपने जीवन से हमे एक सिखाई कि-
हार मनो नहीं, तो कोशिश बेकार नहीं होती
कोशिश करने वालो की कभी हार नहीं होती।
Soichiro Honda -True Inspirational Story In Hindi | Honda Motor Company |
Reviewed by SHUBHAM PAL
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1:29:00 am
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