डूबता Bajaj से सफल Pulsar की कहानी
कुछ दशको पहले की बात है जब लोग सड़को पर चलते थे तो कोई न कोई कही न कही एक स्कूटर को झुका रहा होता था और उसमे बहुत सारी किक मार रहा होता था, हम आज उसी बजाज की कर रहे है। बजाज ऑटो का जन्म 29 नवम्बर 1945 में बछराज ट्रेडिंग कॉर्पोरेशन प्राइवेट लिमिटेड के तौर पर हुआ था। शुरुआत में बजाज बाहर से 2 वहीलर और 3 वहीलर लेकर इण्डिया में बेचती थी। फिर 1965 में राहुल बजाज इस ग्रुप के चेयरमेन बने और देखते देखते बजाज स्कूटर में लीडर हो गया था। लेकिन ये खुशी ज्यादा दिन की नहीं थी और ये कहानी इतनी भी हसीन नहीं है।
वर्ष 1990 में मार्केट ने एक बहुत बड़ी गिरावट को देखा एक बहुत बड़ी मंदी को झेलना पड़ा। जिसका असर बजाज को भी देखने को मिला। वर्ष 1991 में सेल्स 15% से निचे आ गए और वर्ष 1992 में सेल्स फिर से 8% से निचे आ गए। अबतक वैश्विकरण की शुरूआत हो चुकी थी और मार्केट में लोग स्कूटर से बाइक पर आ गए थे क्योकि उनका एवरेज स्कूटर से अच्छा था और पूरी मार्किट स्कूटर से बाइक पर शिफ्ट हो गयी थी। जापानी कंपनी सुजुकी, यामाहा, हीरो होंडा इन सब ने मार्किट में अपनी नई टेक्नोलॉजी के धूम मचाने लगी और बजाज का मार्किट से अपना सारा नियंत्रण खो दिया और बजाज की गद्दी उखड़ गयी। उसका ताज उससे छीन गया।
लेकिन इसके बाद बजाज ऐसा क्या किया जिसके कारण वो फिर से कॉम्पिटिशन में लौट आया और हरने के बाद वो फिर से शिखर पर पहुंच गया।
तो दोस्तों बजाज में परिवर्तन की शुरूआत हुई 90 के दशक से जब राजीव बजाज इंजीनियरिंग करके कंपनी में आये। राजीव बजाज की स्कूटर में काम करने में कोई रूचि नहीं थी और उन्होंने आते ही बाइक्स पर काम करना शुरु किया। काम करने के लिए उन्होंने पुणे में अपना एक प्लांट लगाया और कहा जाता है कि इस प्लांट को लगाने की उनके बड़े लीडर्स की कोई इच्छा नहीं थी। 90 के दशक में बजाज की बादशाहत चली गयी और हीरो होंडा ने 11 मिलियन बाइक्स बेचकर तहलका मचा दिया। शुरूआत में बजाज ने हीरोहोंडा के कॉम्पिटिशन में आने के लिए कई बाइक बनाई लेकिन सब फेल हो गयी क्योकि टेक्नोलॉजी का फर्क था। बजाज के पास 2 स्ट्रोक थी लेकिन हीरोहोंडा के पास 4 स्ट्रोक बाइक थी।
अब यह पर राजीव बजाज ने सोचना शुरू किया और इस नतीजे पर पहुंचे कि ऑंख बंद करके अपने कॉम्पिटिटर को फॉलो करने से कुछ नहीं होगा। फिर उन्होंने अपनी एक मार्किट तैयार करने का निर्णय लिया और मार्किट में अपनी स्पोर्टी बाइक उतार दी जिससे उन्होंने युथ में स्पोर्ट बाइक के लिए जूनून पैदा कर दिया। जिसमे सबसे पहले पल्सर 150 और पल्सर 180 को लाया गया।लेकिन बजाज के लोग कहते है कि इतना असफल लॉन्च आज तक किसी बाइक का नहीं हुआ था और प्रोडक्ट पूरी तरह तैयार नहीं था। यहाँ तक की प्रोडक्ट को मार्किट में हिट करने के लिए अपनी सर्विस वारंटी को भी बढ़ाना पड़ा।
लेकिन फिर भी बजाज ने हिम्मत नहीं हारी और अपनी बाइक को अच्छा बनाते चले गए और देखते ही देखते बजाज फिर से छा गया। वर्ष 2006 में तो बजाज ने हीरोहोंडा से कुछ कम ही बाइक बेचीं। सब कुछ अच्छा चल रहा था लेकिन फिर से कुछ समय बाद बजाज का डाउन फॉल शुरू हो गया और हीरोहोंडा की सेल्स फिर से बजाज से दुगनी हो गयी। उसका कारण ये था कि उन्होंने अपने बेस्ट मॉडल पल्सर पर ध्यान देना बंद कर दिया और एक नई बाइक बनाने में लग गए। वे अपने बेस्ट मॉडल को ठीक ठंग से कैश नहीं कर पाए और ये वही समय था जब सबने बजाज को खत्म मान लिया था और पूरी तरह से बजाज खत्म होने के कगार पर आ गयी थी।
लेकिन राजीव बजाज ने अब अपने सिंगल फोकस के साथ पल्सर पर काम करने का निर्णय लिया और उसे प्रीमियम बाइक बनाने पर काम करने लगे। उन्होने कहा कि किसी भी प्रोडक्ट तब तक नहीं बिक सकता है जब तक उसकी पोजीशन का न पता हो। इसलिए उन्होंने पल्सर को प्रीमियम बनाने का फैसला किया। और आज आप देख ही सकते है कि आज बजाज की पहचान उस झुकाने वाले स्कूटर से बिलकुल बदल गयी है। आज राहुल बजाज बहुत सारी जगह कहते है कि यदि राजीव नहीं होता तो आज बजाज इस शक्ल में नहीं होता।
आपको इस कहानी से सीखना चाहिए कि कैसे बजाज ने समय समय पर अपने आप को बदला इसलिए बदलाव के लिए हमेशा तैयार रहे। साथ ही कभी भी अपने कॉम्पिटिशन को आँख बंद करके फॉलो मत करो क्योकि उसके प्लान से आप उससे कभी नहीं जीत सकते, आपको हमेशा कुछ अलग करना पड़ेगा। साथ ही साथ अगर आपको अपने व्यापार में सफल बने रहना है तो आपको हमेशा नई टेक्नोलॉजी, इनोवेशन करते रहना होगा और बहुत सारे प्रोडक्ट्स पर एक साथ फोकस न करे बल्कि हमेशा अपने एक मुख्य प्रोडक्ट पर फोकस रखे जिससे उसे सबसे अच्छा बनाया जा सके।
साथ ही साथ आपसे कहना चाहूंगा कि जिस प्रकार राजीव बजाज ने हार नहीं मानी बल्कि अपने आप पर भरोसा करते हुए पूरी मेहनत के साथ लगे रहे और इतनी मुश्किलों के बाद भी कंपनी कभी छोड़ा नहीं और फिर उन्हें सफलता भी मिली। इसलिए कभी हार मत मानो अपनी पूरी मेहनत के साथ लगे रहो।
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डूबता Bajaj से सफल Pulsar की कहानी | Story of Rise or Fall of Bajaj | Rajiv Bajaj
Reviewed by SHUBHAM PAL
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7:19:00 am
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