कभी अपनी तुलना किसी से मत करो Stop Compare Yourself
दोस्तों ये कहानी एक MBA ग्रेजुएट के ऊपर है। उसकी ग्रेजुएशन लगभग उस समय पर पूरी हुई जब मंदी ने मार्किट को हिट किया। जैसे हर स्टूडेंट की तरह इसकी भी काफी उम्मीदे थी काफी इच्छाएँ थी और अपने भविष्य को लेकर अपने जीवन लेकर काफी आशाये थी। लेकिन इसके साथ ही वो एक बहुत बड़ा शिकार था अपने आप को और अपनी सफलताओ को दुसरो के साथ तुलना करने का। उसकी पूरी की पूरी अपनी नज़रो में इज्जत इस बात पर निर्भर करती थी कि वो दूसरे के मुकाबले कहा पहुंचा है।अगर ये दुसरो से आगे रहता था तो बहुत खुश रहता था लेकिन अगर वो थोड़ा सा भी पीछे रह जाता तो वह परेशान हो जाता था। जैसे ही इसकी ग्रेजुएशन हुई तो इसका कोई दोस्त CANADA चला गया, कोई पापा के बिज़नेस में चला गया और इसकी एक कॉर्पोरेट कंपनी में नौकरी लग गयी। लेकिन इसको जो अपनी जॉब को लेकर उम्मीदे थी वो उसको नहीं मिल पायी। जैसी जॉब ये चाहता था वैसे इसका करियर सेट नहीं हो पाया। लेकिन आजतक इसकी जिंदगी में ऐसा नहीं हुआ था हमरा दोस्त हमेशा आगे रहा करता था। फिर ये अन्याय क्यों वो बड़े गुस्से में था बड़ा परेशान था। आखिर माँ पिताजी ने लोन लेकर पढ़ाया था इसको और घर की आर्थिक स्थिति भी अच्छी नहीं थी। और अब अच्छी जॉब भी नहीं मिल प् रही थी।
अब वो निराश रहने लगा था और एक दिन ऐसे निराशा में वो जंगल की और निकल गया। वहा पर बैठकर वो अपने आप को कोसने लगा अपनी किस्मत को कोसने लगा। मान लीजिये भगवान से बात करना शुरू किया और बोलै भगवान मेरे जीवन जीने का कोई उद्देश्य बचा ही नहीं है। मुझे लगता है कि मुझे यही अपने जीवन को खत्म कर लेना चाहिए।आपने कोई कारण या कोई उम्मीद की किरण छोड़ी ही नहीं है मेरी जिंदगी में। पहले तो सब कुछ मेरे अनुसार चला करता था लेकिन अपना ऐसा क्यों नहीं है। दोस्तों आप यह एक बात याद रखिये कि ये यहा पर सिर्फ इसीलिए परेशान नहीं था कि इसे जॉब नहीं मिल रही थी बल्कि इसलिए भी था कि इसके दोस्त अचानक से बहुत आगे निकल गए थे और ये पने आप को हारा हुआ महसूस कर रहा था।
फिर उसे अपने आस पास कोई आवाज सुनाई दी और उसने कहा कि बेटा तुम इतने नाराज हो परेशान हो जरा अपने आस पास तो देखो तुम्हे अपने सवालों का भी जवाब मिल जायेगा। यहा तक कि जो तुम जीवन जीने की किरण ढूढ़ रहे हो वो भी तुमको मिल जाएगी। आवाज सुनकर ये बड़ा हैरान हुआ और साथ साथ इसने अपने आस पास देखना शुरू किया तो इसे एक काफी मजबूत कफी घनी एक झाड़ी नज़र आयी और दूसरी ओर मिटटी में एक छोटा सा अंकुर फूटकर बाहर निकल रहा हो। उसने दोनों को देखा और आवाज से पूछा कि मैं कुछ समझा नहीं ?
फिर आवाज ने बोला कि जो ये तुम झाड़ी देख रहे हो और दूसरी ओर बाँस का अंकुर देख रहे हो जो अभी फूट रहा है। तुम्हे नहीं पता लेकिन मैंने इन दोनों के बीज एक ही समय पर लगाये थे। तुम जो ये झाड़ी देख रहे हो जो बड़ी हो गयी है हरी हो गयी सूंदर हो गयी है और ये बाँस का अंकुर जो अभी धरती से फूट ही रहा है इसका बीज भी तभी लगाया था जब झाड़ी का बीज लगाया था। दोनों को मैंने बराबर धुप दी, बराबर पानी दिया, बराबर खाद दिया फिर भी दोनों को बढ़ने में अलग अलग वक्त लगा। क्योकि जिस समय झाड़ी बड़ी होकर मजबूत हो गयी थी हरी हो गई थी उस समय वो बाँस का बीज खत्म नहीं हुआ था बल्कि वो सतह के निचे था और अपनी जड़ो का मजबूत कर रहा था।
एक बात ये भी है कि झाड़ी और बाँस का अपना अपना समय लगता बढ़ने में और हमे कभी इन्हे तुलना ही नहीं करनी चाहिए। हमे कभी किसी की तरक्की को देखकर जलना नहीं चाहिए, निराश नहीं होना चाहिए क्योकि सभी का आगे बढ़ने अपना अपना समय होता है। क्योकि झाड़ियाँ जल्दी बड़ी हो जाती है ,लेकिन वृक्षो को बड़े होने में समय लगता है। दोनों की ही सृस्टि में अपनी अपनी जगह है।
और याद रखो आपका जीवन कोई दौड़ नहीं है सभी चीज़े अपने समय पर ही होगी। इसीलिए अपनी तुलना किसी से कभी मत करो क्योकि सभी का समय आएगा और निश्चित आएगा।
कभी अपनी तुलना किसी से मत करो | Inspirational Story in Hindi | Stop Comparing Yourself to Others
Reviewed by SHUBHAM PAL
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1:34:00 pm
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