पागलपन हो तो ऐसा हो
टूरिस्ट गाइड का काम करने वाला मामूली सा इंसान, एक छोटी से नौकरी के लिए भी 30 बार इंटरव्यू में फेल हुआ वो इंसान फिर भी वो आज चीन का सबसे अमीर आदमी है। हा मैं बात कर रहा हूँ अलिबाबा के फाउंडर जैक मा की। ये किस्मत का नहीं मेहनत का खेल है। सफलता पाने के लिए पागलपन का खेल है।ऐसा ही पागलपन नवाजुद्दीन सिद्धकी के अंदर भी अपनी एक्टिंग को लेकर था। इसी लिए दिन में चौकीदार की नौकरी की भूखे पेट सोया, 14 साल तक फिल्म इंडस्ट्री में खुद को साबित करने के लिए दिन रात एक कर दिए। और शायद ही कोई भारतीय हो जो नवाजुद्दीन सिद्धिकी के बारे में नहीं जनता हो।
दोस्तों क्या होता अगर महेंद्र सिंह धोनी ने भी रिस्क न लिया होता तो शायद टीम इंडिया में उनके खेलने का सपना सिर्फ एक सपना ही रह जाता। सरकारी नौकरी छोड़ने के फैसले को उस समय भी लोगो ने पागलपन ही बोला था। क्या होता अगर उस समय धोनी लोगो की बातो में आ जाते। दोस्तों दुनिया में हर शोहरत के पीछे कई सालो की कड़ी मेहनत होती है।
याद रखो जब सारी दुनिया आपके खिलाफ हो और दुनिया आपसे कहे कि हार मान लो लेकिन आपका दिल आपसे कह रहा हो कि एक बार ओर कोशिश करो तो हमेशा अपने दिल की आवाज सुनना।
एक लड़की जिसकी 18 साल की उम्र में बिना उसकी मर्ज़ी के शादी कर दी गई थी। शादी की महज दो साल बाद एक कार एक्सीडेंट में उनके कमर के नीचे का पूरा हिस्सा खराब हो चुका था और वो कभी माँ नहीं बन सकती थी। जिससे उसके पति ने भी उसे छोड़ दिया क्योकि कभी हार न मानने का जज्बा और जीत के लिए पागलपन की वजह से आज उस लड़की को पाकिस्तान की आयरन लेडी कहा जाने लगा। ये बात हो रही है मुनीबा मजारी की जो आज संयुक्त राष्ट्र में पाकिस्तान की नेशनल अम्बेसडर है।
तो इतिहास में अगर किसी ने अपने जूनून और जज्बे के दम पर अपनी सफलता को हासिल कर लिया है तो आपको भी आज किसी चीज़ को हासिल करने के लिए अपने अंदर जुनून जगाना होगा और अपनी सारी ऊर्जा को एक दिशा में फोकस करना होगा। जिससे आपको अपने लक्ष्य के अलावा कुछ दिखाई नही देगा।
क्या खूब कहा है किसी ने -
यु हीं नहीं मिलती राही को मंजिल, एक जुनून सा दिल में जगाना होता है
जब पूछा चिड़िया से कैसे बना आशियाना, बोली भरनी पड़ती है बार बार उड़ान और तिनका तिनका उठाना पड़ता है।
भारतीय क्रिकेटर युवराज सिंह ने अपनी खेल की इतनी दृढ़ इच्छा थी कि उन्होंने कैंसर जैसी घातक बीमारी को भी हरा दिया। ये ही नहीं दशरथ मांझी जैसे एक मामूली से इंसान ने अपनी दृढ़ इच्छा और जुनूनीपन में एक छीनी हथौड़े के दम पर एक पहाड़ के बीच से रास्ता बना दिया। इन सभी लोगो में एक बात कॉमन थी कि इनसब ने मुश्किलों के आगे घुटने नहीं टेके बल्कि जो ठान लिया वो करके दिखाया। ये लोग अपनी मंजिल को पाने के लिए लगातार प्रयास करते रहे।
दोस्तों प्रयास छोटा ही सही लेकिन लगातार होना चाहिए जैसे कि बारिश की एक बूँद छोटी ही होती है लेकिन उसका लगातर बरसना नदी का बहाव बन जाता है। अपने सपनो को साकार करने के लिए इतनी शिद्द्त से मेहनत करो कि जो हँस रहे है तुम्हारे सपनो पर वो कल तुमसे मिलने के सपने देखे।
दोस्तों जिंदगी में सफलता पाने के तीन नियम है। खुद से वादा, मेहनत उससे ज्यादा और उससे भी मजबूत इरादा।
कभी नदी में गिरने से किसी की मौत नहीं होती है बल्कि तब होती अगर उसे तैरना न आता हो। इसी प्रकार कोई भी परिस्थिति समस्या नहीं होती बल्कि समस्या तब बन जाती है जब उससे निपटना न आता हो। आपका भविष्य उसी से बनता है जो आप आज कर रहे हो इसीलिए अपने आज को बेहतर बनाओ तो आने वाला कल अपने आप ही बेहतर हो जायेगा।
और अंत में सिर्फ इतना ही कि - कुछ कर गुजरने के लिए मौसम नहीं मन चाहिए
साधन भी सारे जुट जायेगे बस संकल्प सा धन चाहिए।
जितना बड़ा सपना होगा उतनी ही बड़ी तकलीफ होगी
जितनी बड़ी तकलीफ होगा उतनी ही बड़ी आपकी जीत होगी।
पागलपन हो तो ऐसा हो | Pagalpan Ho To Aisa Ho Motivation
Reviewed by SHUBHAM PAL
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11:03:00 pm
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