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बड़ी सोच का बड़ा जादू | Book Summary: The Magic of Thinking Big by David J. Schwartz






बड़ी सोच का बड़ा जादू 

आप के दिमाग में जब भी कोई व्यापार करने का आईडिया आता है तो अचानक उसको ना करने के बहाने भी उसके साथ ही आ जाते है जैसे कि मेरे पास पैसे नहीं है, मुझे व्यापार का अनुभव नहीं है आदि।

हमे कोई बड़ा काम क्यों नहीं कर पाते बल्कि हमे बड़ा काम ना करना पड़े उसके लिए बहाने क्यों ढूढ़ने लगते है और इसका हल क्या है ? ये जानेगे आप डेविड जे श्वार्ट्ज की किताब बड़ी सोच का बड़ा जादू  से जिससे आप बहाने बनाने की आदत को छोड़ सकते है और बड़ा काम कर सकते है।

डेविड श्वार्ट्ज कहते है कि हम सबके अंदर एक बीमारी होती है जिसे डेविड ने EXCUSITIS का नाम दिया है  यानि बहाना बनाने की बीमारी।

पहला सबसे सामान्य बहाना होता है कि  मेरे पास बड़े सक्सेसफुल लोगो जितना ज्ञान नहीं है। ये बहाना इतना सामान्य है कि 95% लोगो में ये रहता है। ज्यादातर लोग दुसरो के सामने ये मानने को तैयार नहीं होते है कि उनमे समझदारी नहीं है लेकिन वो अंदर से बात मानते है। जब ज्ञान की बात आती है तो हममे से ज़्यादातर लोग दो बेसिक गलतिया करते है। पहली गलती करते है कि  हम अपने ज्ञान को कम करके आंकते है तथा दूसरी गलती करते है कि  हम दुसरो के ज्ञान का ज्यादा करके आंकते है।
            इन गलतियों के कारण लोग काफी नुकसान में रहते है और मुश्किल समय का सामना करने में फेल हो जाते है क्योकि उन्हें लगता है कि उनमे उतना ज्ञान नहीं है। और व्ही एक व्यक्ति ऐसा भी आता है जो इंटेलिजेंस की परवाह नहीं करता है और फिर उसे उसका मनचाहा काम मिल जाता है।

रिसर्च कहती है कि यदि 100 IQ वाला व्यक्ति सकारात्मक, आशावादी है तो वह उस व्यक्ति से ज्यादा सफलता हासिल करेगा जो 120 IQ वाला है लेकिन नकारात्मक, निराशावादी है। और इस आदत के इलाज के तीन तरीके है। पहला होता है कि  कभी अपनी इंटेलिजेंस को कम मत आंकना और दुसरो की जरूरत से ज्यादा ना आंकना। अपने गुणों को ढूढ़िये। याद रखिये ये जरूरी नहीं है कि आप कितने इंटेलीजेंट है, जरूरी ये है कि आप अपनी इंटेलिजेंस को किस प्रकार इस्तेमाल करते है। इस बात से परेशान न हो कि आपना IQ कम है बल्कि अपना रवैया हमेशा सकारात्मक रखे।  दूसरा होता है कि हमेशा अपने आप को याद दिलाये कि मेरे इंटेलिजेंस से ज्यादा जरूरी मेरा रवैया (ATTITUDE) है।  अपनी जॉब और घर पर सकारात्मक रवैया की प्रैक्टिस करे। काम टालने के तरीके खोजने के बजाय काम करने के तरीके खोजे और अपने आप में मैं जीत रहा हूँ का रवैया पैदा करे। अपनी इंटेलिजेंस का इस्तेमाल अपनी असफलताओ के बहाने खोजने न करे बल्कि सफलता के अवसर तलाशने के लिए करते रहे। तीसरा तरीका होता है कि फैक्ट्स को याद रखने से ज्यादा जरूरी होता है सोचने की काबिलियत इसलिए अपने दिमाग को रचनात्मक बनाये और नए नए विचारो को आने दे। हमेशा काम करने के नए नए और अच्छे तरिके खोजते रहे। खुद से हमेशा पूछे कि क्या मैं दिमाग का इस्तेमाल इतिहास रचने में कर रहा हूँ या इतिहास को रटने में कर रहा हूँ ?

दूसरा बहाना होता है उम्र का, जिसमे सारा दोष उम्र के मत्थे मढ़ दिया जाता है। इसको आप बड़ी आसानी से पहचान सकते हो क्योकि ये दो ही तरह का होता है, एक होता है कि मेरी उम्र बहुत ज्यादा है और दूसरा मेरी उम्र बहुत कम है। कुछ लोग सोचते है कि  वो व्यापार शुरू करने के लिए बहुत छोटे है और कुछ सोचते है कि वे अब बहुत बूढ़े हो चुके है। ये उम्र का बहाना बनाने की बीमारी भी बहुत तेज़ी से फ़ैल रही है।
इसके इलाज के भी बहुत से तरीके है जैसेकि - आप वो काम करो जो भविष्य में करना चाहते हो। जब आप अपने दिमाग को नकारात्मक कर लेते हो और सोचते हो कि अब तो समय निकल चूका है तभी आपके हाथ से समय निकलना शुरू हो जाता है तो ये सोचना छोड़ दो कि मुझे ये काम सालों पहले शुरू कर देना चाहिये था। ये एक हारे हुए इंसान की सोच होती है इससे अच्छा है आप ये सोचो की मैं ये काम शुरू करने जा रहा हूँ और मेरे अच्छे साल आने वाले है।

एक और बहाना बहुत फेमस है कि मेरा तो मामला की अलग है यार मेरी तो किस्मत ही खराब है। श्वार्ट्ज ने एक्सीडेंट के बारे में एक टैफिक वाले से बात की उसने बताया कि रोड एक्सीडेंट में हर साल करीबन 40 हज़ार लोग मारे जाते है। उसकी बातो का पॉइंट ये था कि शायद ही कोई सच्चा एक्सीडेंट हुआ हो हम जिसे एक्सीडेंट मानते है वो किसी इंसान या मशीनी गड़बड़ी का रिजल्ट होता है। जिसका मतलब था कि कोई भी चीज़ बिना कारण के नहीं होती है। उसी प्रकार हमारे साथ जो कुछ भी होता है उसका भी कोई न कोई कारण जरूर होता है। लेकिन शायद ही ऐसा कोई दिन जाता हो जिसदिन हम किसी न किसी को अपनी बदकिस्मती का रोना रट हुए न सुनते हो  या किसी दूसरे की सक्सेस पर उसे अच्छी किस्मत की दुहाई देते हुए ना सुनते हो।

सोचिये अगर किस्मत के सहारे सारी कंपनी काम करे और किस्मत ही ये निर्णय ले कि  कौन आदमी मैनेजर बनेगा और कौन आदमी चपरासी बनेगा तो इस देश का हर व्यापार चौपट हो जायेगा।

एक मिनट के लिए सोचो कि हम टाटा कंपनी को किस्मत के सहारे फिर से बनाते है। इस काम के लिए हम एक बॉक्स में सभी कर्मचारी के नाम की पर्ची दाल देते है। फिर पर्ची उठाने जो पहले नाम निकलेगा उसे प्रेजिडेंट बना देंगे , फिर दूसरे नाम को वाईस प्रेजिडेंट, फिर ऐसे ही हम निचे तक आते जायेगा। क्यों ये बेफ़कूफी भरा नहीं लगता है। लेकिन किस्मत तो ऐसे ही काम करती है।

जो भी लोग दुनिया में सक्सेसफुल होते है, टॉप पर पहुंचते है वो इसलिए क्योकि उनका रवैया WINNER वाला होता है और साथ ही वो खूब मेहनत करते है। वो लोग अपनी सोच को बड़ा रखते है।



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बड़ी सोच का बड़ा जादू | Book Summary: The Magic of Thinking Big by David J. Schwartz बड़ी सोच का बड़ा जादू | Book Summary: The Magic of Thinking Big by David J. Schwartz Reviewed by SHUBHAM PAL on 5:43:00 am Rating: 5

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